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प्रोविंशल की ओर से
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ख्रीस्त में प्यारे भाइयो और बहनो,
2026 का यह नया वर्ष हमें एक ऐसी शांति की ओर बढ़ने का निमंत्रण देता है, जो हथियारों, डर और धमकियों पर आधारित नहीं हो, बल्कि प्रेम, विश्वास और करुणा से हृदयों को जीतती हो।
पोप लियो चौदहवें द्वारा प्रस्तुत विषय “शांति : निहत्थी और हृदयों को जीतने वाली” हमें स्मरण कराता है कि सच्ची शांति केवल व्यवस्था या सुरक्षा से नहीं आती। वह तब आती है जब हम येसु को – जो शांति के सच्चे स्रोत हैं और स्वयं शांति हैं – अपने जीवन, परिवार और समाज में स्थान देते हैं; जब हम उनसे जीवंत संबंध बनाते हैं।
जब हम अपने जीवन को दूसरों के लिए खोलते हैं, संवाद करते हैं, क्षमा करते हैं, और न्याय को प्रेम के साथ जीते हैं, तब हमारे भीतर वह शांति जन्म लेती है जो भय को हराती है और संबंधों को जोड़ती है।
हमारे आदिवासी ख्रीस्तीय समुदाय ने सदैव शांति को अपने गीतों, नृत्यों, धार्मिक और सामाजिक जीवन में जिया है। यह शांति हमारी संस्कृति की आत्मा है एक ऐसी आत्मा जो हथियार नहीं उठाती, बल्कि दूसरों के हथियार गिरा देती है।
येसु हमारे लिए सच्चे शांति निर्माता हैं। उन्होंने कभी तलवार नहीं उठाई, बल्कि क्रूस को गले लगाया। उन्होंने कहा: “धन्य हैं वे जो मेल कराते हैं, क्योंकि वे ईश्वर के पुत्र कहलाएँगे।” (मत्ती 5: 9 ) उनसे जुड़े बिना हम सच्ची शांति की स्थापना नहीं कर सकते हैं।
संत इग्नासियुस हमें सिखाते हैं कि सच्चा प्रेम शब्दों से नहीं, कार्यों से प्रकट होता है। आइए हम इस वर्ष अपने जीवन को ऐसा बनाएँ कि वह शांति का साधन बने – न केवल निहत्था, बल्कि दूसरों के भय और क्रोध को भी शांत करनेवाला ।
हमारे लिए अपनी धरती से एक प्रेरक उदाहरण हैं फादर हेरमन रसकार्ट – बेल्जियम येसु समाजी मिशनरी जिन्होंने सिमडेगा के कुटुंगिया गाँव में दो समुदायों के बीच शांति स्थापित करने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने निहत्थे होकर निर्दोषों की रक्षा की, और अपने जीवन से यह साक्ष्य दिया कि सच्ची शांति साहस, बलिदान और प्रेम से जन्म लेती है।..
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येसु समाज की महासभा 36, हमें यह याद दिलाती है: “हमारा जीवन और मिशन, न्याय को बढ़ावा देने के लिए गहराई से एकीकृत होना चाहिए, और मेल-मिलाप के हर आयाम में सक्रिय रहना हमारे विश्वास की माँग है। “
इस बाइबल डायरी के हर पृष्ठ पर ईश्वर का वचन हमें प्रेरित करता है कि हम शांति के सच्चे साधक बनें। आइए हम अपने जीवन को ऐसा बनाएँ कि वह दूसरों के लिए आशा का स्रोत हो – एक ऐसा जीवन जो प्रेम, सेवा और विश्वास से भरा हो।
प्रभु हमें साहस दे कि हम इस शांति को जी सकें, बाँट सकें, और अपने समाज में इसे रोप सकें।
फादर अजीत कुमार खेस्स, ये०स० प्रोविंशल, येसु समाज, राँची ।
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